उत्तराखंड,देहरादून, कों भारतीय चिकित्सा समुदाय की गरिमा, सुरक्षा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA), देहरादून शाखा ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘सूर्या’ में चिकित्सकों के चित्रण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
IMA द्वारा डॉ महेश कुरियाल ने प्रेस क्लब देहरादून में प्रेस वार्ता में कहा कि हम यहां किसी फिल्म, कलाकार या रचनात्मक अभिव्यक्ति का अंधविरोध करने के लिए एकत्रित नहीं हुए हैं। हमारा उद्देश्य एक अत्यंत संवेदनशील विषय पर समाज का ध्यान आकर्षित करना है – चिकित्सकों के प्रति आम जनता की धारणा, चिकित्सा पेशे की गरिमा और डॉक्टरों की सुरक्षा।
एसोसिएशन ने बताया कि फिल्म ‘सूर्या’ के एक दृश्य में दिखाया गया है कि एक पिता अपनी बेटी के इलाज के लिए अस्पताल जाता है, वह डॉक्टर को भगवान का रूप मानकर विश्वास करता है, लेकिन बाद में उसे अतिरिक्त जांचों, पांच लाख रुपये के बिल और कमीशनखोरी जैसी अनियमितताओं का सामना करना पड़ता है।
IMA ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अस्पताल या चिकित्सक द्वारा वास्तव में अनावश्यक जांचें कराई जाती हैं, मरीजों का आर्थिक शोषण किया जाता है या कमीशन के लिए चिकित्सा का दुरुपयोग होता है, तो हम भी इसकी निंदा करते हैं। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ लोगों की कथित गलतियों को पूरे चिकित्सक समुदाय की पहचान के रूप में प्रस्तुत करना उचित है? हर पेशे की तरह चिकित्सा क्षेत्र में भी अलग-अलग प्रवृत्तियों के लोग हो सकते हैं। किसी एक व्यक्ति की गलती के आधार पर पूरे पेशे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यदि एक व्यक्ति अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए; उसके पूरे समुदाय को अपराधी के रूप में चित्रित करना न्यायसंगत नहीं है।
डॉक्टर भी इसी समाज का हिस्सा हैं। वे दिन-रात मरीजों का उपचार करते हैं, आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जिम्मेदारियों को पीछे छोड़ते हैं और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाने का प्रयास करते हैं। हजारों चिकित्सक सीमित संसाधनों में भी पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके समर्पण, ईमानदारी और मानवीय संवेदनाओं को भी समाज के सामने आना चाहिए।
IMA ने कहा कि हमारी चिंता केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है। भारत में सिनेमा का समाज की सोच और व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जब किसी संवेदनशील विषय को भावनात्मक और आक्रामक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, तो दर्शक उसके संदेश से प्रभावित हो सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि हर दर्शक हिंसक हो जाएगा, लेकिन ऐसी प्रस्तुति के सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।
आज चिकित्सकों के विरुद्ध गाली-गलौज, धमकी, अस्पतालों में तोड़फोड़ और शारीरिक हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय हैं। कई बार उपचार के परिणाम को लेकर स्वाभाविक दुख और आक्रोश भी बिना पूरी जानकारी या जांच के चिकित्सकों के विरुद्ध हिंसा में बदल जाता है। ऐसे माहौल में यदि चिकित्सकों को एक लालची, कमीशनखोर या मरीजों का शोषण करने वाले वर्ग के रूप में सामान्यीकृत किया जाता है, तो यह पहले से मौजूद अविश्वास को और बढ़ा सकता है। इससे मरीज और डॉक्टर के बीच का विश्वास कमजोर हो सकता है और तनाव बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
हमारा कहना है कि जब समाज में पहले से तनाव मौजूद हो, तब मनोरंजन के नाम पर ऐसी सामान्यीकृत छवि प्रस्तुत करने के संभावित परिणामों के प्रति अतिरिक्त संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। आग में घी डालने के बजाय हमें विश्वास और संवाद को मजबूत करना चाहिए।
हमारा विरोध किस बात से है?
हम भ्रष्टाचार के विरोध में हैं, लेकिन किसी पूरे पेशे के चरित्र-हनन के पक्ष में नहीं हैं।
हम मरीजों के अधिकारों के साथ हैं, लेकिन डॉक्टरों की गरिमा और सुरक्षा को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते हैं।
हम जवाबदेही के पक्षधर हैं, लेकिन बिना तथ्यात्मक आधार के पूरे चिकित्सक समुदाय के प्रति अविश्वास पैदा करने के विरुद्ध हैं।
हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन यह भी मानते हैं कि व्यापक जनप्रभाव रखने वाले माध्यमों को अपने सामाजिक दायित्व और प्रस्तुतिकरण के संभावित प्रभावों पर विचार करना चाहिए।
IMA की अपील
IMA ने फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, मीडिया और समाज से अपील की है कि चिकित्सा जैसे संवेदनशील विषयों को प्रस्तुत करते समय संतुलन, तथ्यात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाए। यदि किसी फिल्म में भ्रष्टाचार दिखाया जाता है, तो उसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि गलत आचरण कुछ व्यक्तियों का हो सकता है, वह पूरे चिकित्सक समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
हम यह भी अपील करते हैं कि किसी मरीज या उसके परिजनों की शिकायत को गंभीरता से सुना जाए, उसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई हो। लेकिन किसी भी शिकायत का समाधान हिंसा, धमकी या पूरे पेशे के प्रति घृणा से नहीं हो सकता।
डॉक्टर और मरीज एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। वे एक ही व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं, जिनका साझा उद्देश्य मरीज का स्वास्थ्य और जीवन बचाना है।
अंत में IMA ने कहा, “गलत डॉक्टर का विरोध कीजिए, लेकिन हर डॉक्टर को गलत मत कहिए। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाइए, लेकिन पूरे चिकित्सक समुदाय की छवि को धूमिल मत कीजिए। मरीजों के अधिकारों की रक्षा कीजिए, लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान को भी सुनिश्चित कीजिए।”
हम किसी के विरुद्ध घृणा नहीं, बल्कि समाज में विश्वास, संवेदनशीलता, निष्पक्षता और सुरक्षित चिकित्सा वातावरण के पक्ष में खड़े हैं।
