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ऋषिकेश -इस अवसर पर उन्होंने आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताते हुए कहा कि 12 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को हाई कोर्ट के न्यायाधीश जगमोहनलाल सिन्हा द्वारा अवैध घोषित किया गया था।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि निर्णय में यह आधार बनाया गया कि चुनाव के दौरान अवैध तरीकों का उपयोग किया गया, जिसमें सरकारी तंत्र का दुरुपयोग, अनुचित प्रभाव और अन्य अनियमितताएं शामिल थीं। इसके पश्चात 13 जून को विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर उचित कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने आगे कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर से देश में आपातकाल घोषित कर दिया गया। इसके बाद लोकतांत्रिक मूल्यों को दरकिनार करते हुए विपक्ष के प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। लगभग 21 महीनों तक चले आपातकाल के दौरान प्रेस और मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए तथा लाखों लोगों को कारावास में रखकर मानसिक एवं शारीरिक यातनाएं दी गईं।

डॉ. अग्रवाल ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके बड़े भाई स्वर्गीय ताराचंद अग्रवाल को भी उस समय मात्र एक पत्र लिखने के कारण जेल जाना पड़ा था एंव यातनाएं सहनी पड़ी। उन्होंने कहा कि आज जो लोग लोकतंत्र और संविधान की बात करते हैं, उन्हें उस दौर को नहीं भूलना चाहिए जब लोकतंत्र का गला घोंटा गया था।

कार्यक्रम में वीरभद्र मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, मंडल महामंत्री पुनीता भंडारी, महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष पिंकी धस्माना, श्यामपुर महिला मोर्चा मंडल अध्यक्ष दीपा राणा, राहुल कश्यप, मुकेश धीमन, मनोरमा, जयपाल त्यागी, पार्षद विनोद नाथ सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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